डासना तालाब पर NGT का बड़ा एक्शन, कथित अवैध खनन की संयुक्त जांच के आदेश

डासना/गाजियाबाद। डासना स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर के सामने खसरा संख्या 2076, 2077 और 2078 में स्थित सार्वजनिक तालाब को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा कदम उठाया है। डी-सिल्टिंग की आड़ में कथित अवैध खनन के आरोपों को गंभीर मानते हुए एनजीटी ने मामले की संयुक्त जांच कराने के आदेश दिए हैं।

यह मामला पहले से एनजीटी में विचाराधीन डासना तालाब संरक्षण प्रकरण से जुड़ा हुआ है। अब वसीम राजा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य (ओए संख्या 390/2026) को अफसर अली बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य (ओए संख्या 30/2022) के साथ जोड़कर सुनवाई की जाएगी। 10 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में एनजीटी की प्रधान पीठ ने कहा कि मामला पर्यावरणीय मानकों के पालन से जुड़ा गंभीर विषय है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक खुदाई कर कथित अवैध खनन किया गया। यह भी दावा किया गया कि नगर पंचायत डासना की 21 मई 2026 की रिपोर्ट में डी-सिल्टिंग कार्य पूरा बताया गया था, जबकि बाद की तस्वीरों में खुदाई जारी दिखाई देने की बात सामने आई।

एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भू-विज्ञान एवं खनन निदेशालय तथा जिलाधिकारी गाजियाबाद की संयुक्त समिति गठित कर दो माह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खनन विभाग को निर्देशित किया गया है कि जांच पूरी होने तक तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर किसी भी प्रकार का अवैध खनन न होने दिया जाए।गौरतलब है कि अफसर अली कई वर्षों से डासना तालाब के संरक्षण और पुनर्जीवन की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब नए आरोपों की जांच एनजीटी की निगरानी में होगी। हालांकि, कथित अवैध खनन के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट तथा एनजीटी के आगामी आदेशों के आधार पर तय होगा।

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